राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना

राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम

सरकार ने संसद द्वारा पारित, राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम,2013 दिनांक 10 सितम्‍बर,2013 को अधिसूचित किया है,जिसका उद्देश्‍य एक गरिमापूर्ण जीवन जीने के लिए लोगों को वहनीय मूल्‍यों पर अच्‍छी गुणवत्‍ता के खाद्यान्‍न की पर्याप्‍त मात्रा उपलब्‍ध कराते हुए उन्‍हें मानव जीवन-चक्र दृष्‍टिकोण में खाद्य और पौषणिक सुरक्षा प्रदान करना है। ( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )

इस अधिनियम में,लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (टीपीडीएस) के अंतर्गत राजसहायता प्राप्‍त खाद्यान्‍न प्राप्‍त करने के लिए 75%ग्रामीण आबादी और 50%शहरी आबादी के कवरेज का प्रावधान है,इस प्रकार लगभग दो-तिहाई आबादी कवर की जाएगी।( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )

पात्र व्‍यक्‍ति चावल/ गेहूं/मोटे अनाज क्रमश: 3/ 2/1 रूपए प्रति किलोग्राम के राजसहायता प्राप्‍त मूल्‍यों पर 5 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्रति व्‍यक्‍ति प्रति माह प्राप्‍त करने का हकदार है। मौजूदा अंत्‍योदय अन्‍न योजना परिवार,जिनमें निर्धनतम व्‍यक्‍ति शामिल हैं,35 किलोग्राम खाद्यान्‍न प्रति परिवार प्रति माह प्राप्‍त करते रहेंगे।( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )

इस अधिनियम में महिलाओं और बच्‍चों के लिए पौषणिक सहायता पर भी विशेष ध्‍यान दिया गया है। गर्भवती महिलाएं और स्‍तनपान कराने वाली माताएं गर्भावस्‍था के दौरान तथा बच्‍चे के जन्‍म के 6 माह बाद भोजन के अलावा कम से कम 6000 रूपए का मातृत्‍व लाभ प्राप्‍त करने की भी हकदार हैं।

14 वर्ष तक की आयु के बच्‍चे भी निर्धारित पोषण मानकों के अनुसार भोजन प्राप्‍त करने के हकदार हैं। हकदारी के खाद्यान्‍नों अथवा भोजन की आपूर्ति नहीं किए जाने की स्‍थिति में लाभार्थी खाद्य सुरक्षा भत्‍ता प्राप्‍त करेंगे। ( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )

इस अधिनियम में जिला और राज्‍य स्‍तरों पर शिकायत निपटान तंत्र के गठन का भी प्रावधान है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्‍चित करने के लिए भी इस अधिनियम में अलग से प्रावधान किए गए हैं।

अधिनियम के कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति

अब यह अधिनियम सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में क्रियान्‍वित किया जा रहा है और 81.34 करोड़ व्‍यक्‍तियों के लक्षित कवरेज में से 80.72 करोड़ व्‍यक्‍ति कवर किए जा रहे हैं।( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )

चंडीगढ़, पुडुचेरी में और दादरा व नगर हवेली में अधिनियम नकद अंतरण विधि में क्रियान्‍वित किया जा रहा है, जिसके अधीन खाद्य राजसहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में जमा की जाती है। इसके बाद उनके पास खुले बाजार से खाद्यान्‍न खरीदने का विकल्‍प होता है।( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )

राज्‍य खाद्य आयोगों के लिए गैर-भवन परिसम्‍पत्‍तियों के लिए राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को सहायता

राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (एनएफएसए) में यह प्रावधान है कि प्रत्‍येक राज्‍य सरकार इस अधिनियम के कार्यान्‍वयन की निगरानी एवं समीक्षा के प्रयोजनार्थ अधिसूचना द्वारा एक राज्‍य खाद्य आयोग का गठन करेगी।

यह निर्णय लिया गया है कि किसी राज्‍य द्वारा एक विशेष राज्‍य खाद्य आयोग का गठन करने का निर्णय लिए जाने के मामले में,केन्‍द्र सरकार राज्‍य खाद्य आयोग के लिए गैर-भवन परिसम्‍पत्‍तियों हेतु एकबारगी वित्‍तीय सहायता प्रदान करेगी। ( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )

तदनुसार,इस विभाग की अम्ब्रेला स्‍कीम”सार्वजनिक वितरण प्रणाली का सुदृढ़ीकरण”के अंतर्गत एक घटक अर्थात”राज्‍य खाद्य आयोगों के लिए गैर-भवन परिसम्‍पत्‍तियों हेतु राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को सहायता”शामिल किया गया है। इस घटक के अंतर्गत गैर-भवन परिसम्‍पत्‍तियों जैसे फर्नीचर,आफिस उपकरण,कंप्‍यूटरों आदि के लिए सहायता उपलब्‍ध है।

इनमें कम्‍प्‍यूटर,एयर कंडीनशर,फोटोकापी मशीनें,फैक्‍स मशीनें, टेलीफोन,ईपीएबीएक्‍स सिस्‍टम,टेबल,कुर्सियां,स्‍टोरेज यूनिट आदि को शामिल किया जा सकता है। इस स्‍कीम के अंतर्गत किसी भी निर्माण कार्य अथवा किसी आवर्ती व्‍यय के लिए सहायता प्रदान नहीं की जाती है।

कार्य

  • खाद्य से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों, संगमों और अन्य निकायों अर्थात अंतर्राष्ट्रीय गेहूं परिषद, विश्व खाद्य परिषद, अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान, खाद्य सुरक्षा संबंधी आयोग/ समितियों में भाग लेना और लिए गए विनिश्चयों का कार्यान्वयन।
  • विदेशों से संधि और करार करना तथा खाद्यान्नों और अन्य खाद्य पदार्थो में व्यापार एवं वाणिज्य के संबंध में विदेशों से की गई संधियों, करारों और अभिसमयों को कार्यान्वित करना ।
  • खाद्यान्नों, जिनमें शर्करा भी है, के भंडारण के लिए गोदामों को भाड़े पर लेना और अर्जित करना तथा खाद्यान्न गोदामों के संनिर्माण के लिए भूमि को पट्टे पर लेना या अर्जित करना ।( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )
  • भारतीय खाद्य निगम और केंद्रीय भाण्डागार तनगम से संबंधित मामले ।
  • सिविल आवश्यकताओं के लिए खाद्य-पदार्थों का क्रय और वितरण तथा सेना के लिए भी शर्करा, चावल और गेहूं का क्रय ।
  • खाद्यानों और अन्य खाद्य-पदार्थों, जिसके अंतर्गत शर्करा भी है, के संमंढ मेन अंतर्राज्यिक व्यापार और वाणिज्य ।
  • खाद्यानों का व्यापार और वाणिज्य तथा पूर्ति और वितरण ।
  • खाद्यानों से भिन्न, शर्करा और खाद्य पदार्थों का व्यापार और वाणिज्य तथा उत्पादन, पूर्ति और वितरण ।
  • शर्करा, खाद्यानों और खाद्य पदार्थों का कीमत नियंत्रण ।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली ।
  • जहां तक कि खाद्यानों का संबंध है, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (1955 का 10) और चोर-बाजारी निवारण और आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिमियम, 1980 (1980 का 7) ।
  • वनस्पति, तिलहन, वनस्पति तेलों, खाली, वसा और शर्करा (जिसके अंतर्गत शर्करा खंडसारी का विकास भी है) से संबन्धित उद्योग ।
  • वनस्पति, तिलहन, वनस्पति तेलों, खली और वसा कि कीमतों का नियंत्रण अरु उनमें अंतर्राज्यिक वायपर तथा वाणिज्य और उनकी पूर्ति एवं वितरण ।
  • वनस्पति, वनस्पति तेल और वसा निदेशालय ।
  • शकय निदेशालय, नई दिल्ली ।
  • राष्ट्रीय शर्करा संस्थान कानपुर ।
  • राष्ट्रीय शर्करा और गन्ना प्रौद्योगिकी संस्थान, मऊ ।
  • शर्करा उद्योग विकास परिषद, नई दिल्ली से संबन्धित मामले ।
  • अंतर्राष्ट्रीय शर्करा परिषद ।
  • शर्करा विकास निधि ।
  • शीरा ।
  • ऐल्कोहोल – औध्योगिक और पेय, जिनका आधार शीरे पर हो ।
  • स्वतंत्र आसवनियाँ ।
( राजस्थान खाद्य सुरक्षा योजना )

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