प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

एक बड़ी आबादी मूल रूप से हर साल बढ़ती खाद्य मांगों को पूरा करने की आवश्यकताओं का बखान करती है। जब सामान्य से कम मानसून खाद्य वस्तुओं की कीमतों को बढ़ाता है तब यह निर्भरता उस वर्ष में सबसे अच्छी तरह से देखी जा सकती है। ( प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना )

पिछले वर्षों में, अल-नीनो (एक मौसमी प्रभाव) की घटना के डर से किसान और अर्थशास्त्री चिंतित हैं। पूरे देश में कई किसानों की मृत्यु भी दर्ज की गई है। इनमें से ज्यादातर फसलों की विफलता का कारण वर्षा की कमी और अपर्याप्त सिंचाई है।

प्राकृतिक आपदाओं के कारण खाद्य और खुदरा मुद्रास्फीति की यह स्थिति अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाती है। 2014-15 में देश का, खाद्यान उत्पादन लगभग 5.3 प्रतिशत तक कम हुआ है।( प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना )

कृषि उत्पादकता में सुधार के प्रयास के लिए भारत सरकार की नई योजना के तहत, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) को लाया गया है। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने इस योजना के विवरण को अंतिम रूप दिया है।

भारतीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि कैबिनेट ने फैसला लिया है कि, “5 वर्षों में, केंद्रीय बजट से 50,000 करोड़ रुपये प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के लिए उपयोग किए जाएंगे। राज्य का हिस्सा इस पर और अधिक होगा”।

उन्होंने कहा कि पूरी तरह से खेती की पैदावार और उत्पादकता में सुधार के लिए रूपये खर्च किए जाएंगे। चालू वित्तीय वर्ष के लिए इस योजना के तह़त खर्च का लक्ष्य 5300 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।( प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना )

यह पहले के बजट में किसी भी कृषि सिंचाई योजना से दो गुना किया गया है। केंद्र सरकार के आवंटन से अधिक, राज्य अपने धन को योजना में जोड़ देंगे।
अर्थशास्त्री और ग्रामीण प्रबंधकों का मानना है अगर यह योजना सफल हो जाती है, तो फसल उत्पादन में कई गुना वृद्धि हो सकती है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का विवरण

वर्तमान अनुमानों के अनुसार, भारत में 142 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि में से केवल 45 प्रतिशत में ही कृत्रिम सिंचाई की उचित व्यवस्था है। उर्वरित कृषि खेत पूरी तरह से पानी की जरूरतों के लिए वर्षा पर निर्भर है।

बारिश में देरी या सूखे की वजह आने वाली आपदा तथा कुछ फसलों के उत्पादन में कामी का सामना करना पड़ रहा है। भारत सरकार का अनुमान है कि एक वित्तीय वर्ष में 5300 करोड़ रुपये खर्च करने के लिए, 6 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई के तहत लाई जा सकती है।

इसके अलावा 5 लाख हेक्टेयर भूमि को भी इसके परिणामस्वरूप टपकन सिंचाई का लाभ मिलेगा। सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं (“हर खेत को पानी”) और शुरू से अन्त तक सिंचाई समाधान इस योजना का मुख्य लक्ष्य होगा।( प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना )

यह योजना विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की ज़िम्मेदारी को भी ग्रहण करेगी जो कि पूँजी की पर्याप्तता के बावजूद पिछली सरकारों द्वारा खराब तरीके से लागू की गई थी। सख्त गुणवत्ता दिशा निर्देशों के आधार पर इन परियोजनाओं में सुधार किया जाएगा। करीब 1,300 वाटरशेड परियोजनाएं जो अधर में लटकी है अब पूर्ण हो जाएंगी।

( प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना )

समाचार पत्रों के अनुसार, वित्त मंत्री ने कहा है कि, “पीएमकेएसवाई” का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र स्तर पर सिंचाई में पूँजी निवेश के अभिसरण को प्राप्त करके भूमिगत खेती के लिए भूमिगत सिंचाई का विस्तार करना, “पानी की बर्बादी को कम करके, सटीक सिंचाई और अन्य जल-बचत प्रौद्योगिकियों में वृद्धि करने के लिए खेत में पानी का उपयोग करने की दक्षता में सुधार किया जाएगा।”

सिंचाई परियोजनाओं के अलावा, इस योजना से 200 करोड़ रुपये कृषि तकनीकि लागत आधारिक संरचना (एटीआईएफ) के रूप में रखे जाएंगे – राष्ट्रीय कृषि बाजार (एनएएम) जरूरी कोष, को बढ़ावा देने के लिए कॉर्पस की आवश्यकता है।

इससे किसान बाजारों में अपने उत्पादन की बिक्री आसानी से कर सकेंगे। खाद्य मंत्री ने यह भी कहा कि इस योजना के लिए बजटीय आवंटन मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) की सामग्रियों में शामिल हो सकता है।

सिंचाई और जल संरक्षण

देश के हर खेत में सिंचाई सुविधाओं को लाने के लिए जल संरक्षण और अपव्यय को कम करना महत्वपूर्ण है। इससे स्थायी जल संरक्षण प्रथाओं और जल संसाधनों के अनुकूलन (प्रति बूँद अधिक फसल) की शुरुआत होती है, जिसमें नई सिंचाई सुविधाओं की शुरूआत करना महत्वपूर्ण है।

“पीएमकेएसवाई” इन सिंचाई परियोजनाओं के लिए नगरपालिका के पानी में सुधार और पुनः उपयोग के लिए कई तरीकों का भी पता लगाएगा। वित्तमंत्री ने कहा है, कि जल पुनर्चक्रण को इस योजना की सफलता में काफी महत्व दिया जाएगा। सरकार द्वारा इन योजनाओं में निजी निवेश की भी मांग की जाएगी।

कार्यक्रम संरचना

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई की योजना और कार्यान्वयन को विकेंद्रीकृत कर दिया गया है और राज्य अब इसके सफल निष्पादन के लिए जिला स्तर की योजनाओं को आकर्षित करेंगे।
( प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना )

इन जिला सिंचाई योजनाओं (डीआईपी) और राज्य सिंचाई योजनाओं (एसआईपी) की लंबी अवधि के अनुपालन को राष्ट्रीय संचालन समिति (एनएससी) द्वारा निगरानी में रखा जाएगा जिसमें शामिल विभिन्न मंत्रालयों से प्रतिनिधित्व किया जाएगा और केंद्रीय मंत्रियों द्वारा इसकी निगरानी की जाएगी। प्रधान मंत्री खुद समिति की अध्यक्षता करेंगे।

इस योजना के कार्यान्वयन पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति (एनईसी) की निगरानी होगी, जिसका संचालन नीति आयोग के उपाअध्यक्ष द्वारा किया जाएगा।

पीएमकेएसवाई और किसान के लिए योजनाएं

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना किसान समर्थक उपायों के समूह का एक हिस्सा है जिसको लागू करने का प्रयास एनडीए सरकार कर रही है। इससे पहले मोदी की अगुवाई वाली कैबिनेट ने भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 में विभिन्न संशोधनों पर सहमति जताई थी।

इसके तहत उन किसानों को लाभ होगा जिनकी भूमि का अधिग्रहण विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार द्वारा किया गया है। इसके अलावा, एनडीए सरकार ने कई गरीब सामाजिक सुरक्षा योजनाओं (पेंशन, बीमा योजना आदि) को देश में बहुत गरीब लोगों में सुधार लाने के लिए लक्षित किया है, ग्रामीण गरीबों पर विशेष जोर दिया गया है।

इस साल के शुरूआती दौर में, सरकार ने परम्परागत कृषि विकास योजना शुरू की जिसमें जैविक खेती के प्रयासों का समर्थन करने के लिए एक योजना बनाई गई है।

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